
घर में बेइंतिहा गरीबी थी। शशिकला जी काम के लिए पिता संग स्टूडियो दर स्टूडियो भटक रही थी। यूं तो 1944 की चांद में वो काम कर चुकी थी। लेकिन तब वो उम्र के उस मोड़ पर खड़ी थी जहां से ना तो उन्हें कोई बाल कलाकार की हैसियत से फिल्मों में लेना चाहता था। और ना ही कोई उन्हें हीरोइन के तौर पर फिल्मों में लेना चाहता था।
काम की तलाश में भटकते हुए ही एक दिन शशिकला जी की मुलाकात मल्लिका-ए-तरन्नुम नूरजहां से हुई थी। उस मुलाकात में शशिकला जी का चेहरा नूरजहां जी को याद रह गया। कुछ महीनों बाद नूरजहां और उनके पति शौकत हुसैन रिज़वी ने एक फिल्म पर काम शुरू किया। उस फिल्म में नूरजहां ही हीरोइन थी। और उनके बचपन का किरदार जो लड़की निभाने वाली थी उसका नाम था नसीम।
किन्हीं वजहों से नसीम की मृत्यु हो गई थी। ऐसे में शौकत हुसैन रिज़वी के सामने नूरजहां के बचपन का किरदार निभाने के लिए एक नई लड़की की तलाश की चुनौती आ खड़ी हुई। उन्होंने चुनौती से पार पाने की कोशिश की। कुछ लड़कियों का ऑडिशन लिया। लेकिन कोई उन्हें ऐसी नहीं लगी जो उस रोल के लिए फिट रहे।
तभी नूरजहां को शशिकला याद आई। उन्होंने अपने स्टाफ को शशिकला को ढूंढने को कहा। कुछ दिन की तलाश के बाद शशिकला जी मिल गई। उन्हें नूरजहां जी से मिलने को कहा गया। अगले दिन शशिकला व उनके पिता नूरजहां व उनके पति शौकत हुसैन रिज़वी से मिलने गए। शौकत हुसैन ने काफी देर तक शशिकला से बात की। और फिर वो अपना माथा पकड़ कर बैठ गए।
शौकत हुसैन को लगा कि ये तो मुश्किल हो जाएगी अगर इस लड़की को फिल्म में लिया तो। दरअसल, शौकत हुसैन रिज़वी शशिकला से जो भी सवाल करते, शशिकला उन्हें मराठी मिक्स हिंदी में जवाब देती। काफी देर तक शौकत हुसैन शशिकला को ऑब्ज़र्व करते रहे। आखिरकार उन्हें पता चला कि ये लड़की ज़रा भी उर्दू नहीं जानती है।
हालांकि इसका चेहरा नूरजहां के बचपन के किरदार के लिए एकदम फिट है। शौकत हुसैन परेशान थे। लेकिन नूरजहां ने कहा कि वो इस लड़की को ट्रेंड करेंगी। इस तरह शशिकला जी को 16 नवंबर 1945 को रिलीज़ हुई फिल्म ज़ीनत में काम मिल गया। नूरजहां ने शशिकला को उनके रोल के लिए बढ़िया ट्रेंड किया था। उनकी ट्रेनिंग का असर ये रहा कि शशिकला ने अच्छे से अपना किरदार निभाया।
उस वक्त को याद करते हुए एक इंटरव्यू में शशिकला जी ने कहा था कि जब वो शोलापुर से मुंबई आई थी तब उनके घर में अक्सर खाने के लिए भी पैसे नहीं बचते थे। ज़ीनत फिल्म में उनके अलावा और भी कुछ लड़कियों को कास्ट किया गया था। एक दिन शौकत हुसैन रिज़वी ने सबसे कहा कि जो लड़की सबसे अच्छा काम करेगी उसे 20 रुपए अतिरिक्त मिलेंगे।
तब वो 20 रुपए हासिल करने के लिए शशिकला ने पूरी लगन से अपना काम किया। और वो 20 रुपए शशिकला जी को ही मिले। उन बीस रुपयों से शशिकला जी के परिवार ने मुंबई आने के बाद पहली दफा दिवाली मनाई थी। उनके पिता ने उन्हें दो साड़ियां भी उन्हीं 20 रुपए में खरीदकर दी थी। शशिकला के अन्य भाई-बहनों के भी कपड़े उन्हीं रुपयों से बने। और पहली दफा इनके घर में दिवाली का जश्न मनाने के लिए पटाखे खरीदे गए थे।
आज शशिकला जी की पुण्यतिथि है साथियों। 04 अप्रैल 2021 को शशिकला जी की मृत्यु हुई थी। जबकी जन्म हुआ था उनका 04 अगस्त 1932 को महाराष्ट्र के सोलापुर में। यूं तो कुछ फिल्मों में शशिकला जी ने बहैसियत हीरोइन भी काम किया था। लेकिन इनकी किस्मत चमकी वैंपिश किरदार निभाने के बाद। शशिकला जी को नमन। शत शत नमन। #Shashikala #rememberingshashikala #shashikalaji
