शिवाजी पार्क से सिनेमा तक: कैसे 13 साल की जयश्री गडकर बनीं मराठी फिल्मों की पहचान
1955 में शिवाजी पार्क के एक कार्यक्रम से शुरू हुआ जयश्री गडकर का सफ़र कैसे मराठी सिनेमा तक पहुँचा—जानिए उनकी शुरुआती ज़िंदगी का अनसुना किस्सा।
1955 में शिवाजी पार्क के एक कार्यक्रम से शुरू हुआ जयश्री गडकर का सफ़र कैसे मराठी सिनेमा तक पहुँचा—जानिए उनकी शुरुआती ज़िंदगी का अनसुना किस्सा।
प्यासा फिल्म का मशहूर गाना “सर जो तेरा चकराए” कैसे बना? जानिए गुरूदत्त, जॉनी वॉकर और एक चंपी वाले की सच्ची और दिलचस्प कहानी।
नूतन और संजीव कुमार के बीच हुआ विवाद हिंदी सिनेमा के सबसे चर्चित किस्सों में से एक है। 1970 में देवी फ़िल्म के सेट पर पड़ा थप्पड़, उससे पहले फैली अफ़वाहें और नूतन का बेबाक स्टैंड—पुण्यतिथि पर जानिए पूरी कहानी, नूतन की ज़ुबानी।
1960 के दौर में अमीन सयानी का बिनाका गीतमाला सिर्फ एक रेडियो प्रोग्राम नहीं, बल्कि लोगों की ज़िंदगी का हिस्सा था। पत्रकार अर्चना मसीह ने अपने लेख में बताया है कि कैसे बुधवार की शामें, रेडियो, और अमीन सयानी की आवाज़ पीढ़ियों की यादों में बस गईं।
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एक्ट्रेस सोनू वालिया की शादी की कहानी में लता मंगेशकर की एक तारीफ़ ने अहम भूमिका निभाई थी। कैसे लता जी के एक कॉम्प्लिमेंट ने सोनू वालिया और प्रताप सिंह को और करीब ला दिया, साथ ही जानिए सोनू वालिया के जीवन, करियर और जन्मदिन से जुड़ी खास बातें।
अन्नू कपूर ने मिस्टर इंडिया से पहले ग़रीबी और संघर्ष का लंबा दौर देखा। बोनी कपूर से मिले 5000 रुपये, शेखर कपूर की फिल्म और अमिताभ बच्चन की तारीफ़—जानिए अन्नू कपूर की ज़िंदगी के अनसुने किस्से।
रेखा अभिनीत जीवनधारा एक त्याग, ज़िम्मेदारी और स्त्री संघर्ष की मार्मिक कहानी है। 1982 में रिलीज़ हुई यह फ़िल्म एक ऐसी महिला की दास्तान है जो अपने परिवार के लिए अपने सपनों की आहुति दे देती है। जानिए इस क्लासिक फ़िल्म से जुड़े रोचक तथ्य और भावनात्मक पहलू।
मनोज कुमार की क्लासिक फ़िल्म पूरब और पश्चिम सिर्फ़ एक फ़िल्म नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, पहचान और आत्मगौरव का सशक्त बयान थी। 1970 में रिलीज़ हुई इस फ़िल्म के 56 साल पूरे होने पर जानिए इसकी मेकिंग से जुड़े अनसुने किस्से, दिलचस्प घटनाएं और वह सोच जिसने इसे कालजयी बना दिया।
Becoming a father changes how you look at the world—especially the digital one. As a new parent, I increasingly believe that unrestricted access to social media is harmful for children. This is why I feel the Modi government must seriously consider banning social media platforms for kids in India.
Mahesh Anand हिंदी सिनेमा के उन कलाकारों में रहे जिनका करियर और निजी जीवन दोनों ही संघर्षों से भरा रहा। मॉडलिंग से फिल्मों तक का सफर तय करने वाले महेश आनंद ने कई शादियां कीं, लेकिन जीवन का आखिरी दौर बेहद अकेलापन और उपेक्षा में बीता। 9 फरवरी 2019 को उनकी मृत्यु ने फिल्म इंडस्ट्री के एक कठोर सच को उजागर किया।