
प्राण साहब
“क्यों हकला रहे हो? क्या बात है?” चिल्लाते हुए प्राण साहब के पिता बोले। प्राण डर गए और रोने लगे। तब उनकी मां ने उनसे बात की। और प्राण ने रोते हुए अपनी मां को सारी बात बताई। साथियों ये प्राण साहब के बचपन का किस्सा है।
आज प्राण साहब के जन्मदिवस के मौके पर ये कहानी आपके लिए पेश है। ये कहानी बहुत दिलचस्प है। पसंद आएगी आपको। प्राण साहब का जन्म सन 1920 में आज ही के दिन, 12 फरवरी को हुआ था। उनकी और कहानियां भी आज शेयर करेंगे। प्राण साहब को नमन। शत शत नमन। चलिए कहानी पर आते हैं।
प्राण साहब भी दूसरे बच्चों की ही तरह बचपन में बड़े शरारती थे। उन दिनों प्राण साहब का परिवार उन्नाव में रहा करता था। उन्नाव के एक स्कूल में प्राण पढ़ते थे। हर बच्चे की तरह उन्हें भी हर चीज़ को देखने-जानने का शौक था। प्राण के पिता लाला केवल कृष्ण सिकंद जी के पास एक कार हुआ करती थी।
नन्हे प्राण को अपने पिता को गाड़ी स्टार्ट करना और चलाते देखने में बड़ा मज़ा आता था। एक दिन लाला केवल कृष्ण दोपहर का का खाना खाने घर आए। खाली गाड़ी देख प्राण ने वो गाड़ी स्टार्ट कर ली और चलाने लगे। लेकिन कुछ ही देर बाद प्राण घबराते हुए घर में आए और हकलाते हुए गाड़ी-गाड़ी कहने लगे। उनके पिता चिल्लाते हुए बोले,”हकला क्यों रहे हो? क्या बात है?” पिता के चिल्लाने से प्राण और ज़्यादा डर गए औ रोने लगे।
तब प्राण की मां ने उनसे बात की। प्राण ने रोते हुए मां को बताया कि गाड़ी तालाब में गिर गई है। कई साल बाद एक इंटरव्यू मेें उस घटना के बारे में बात करते हुए प्राण ने बताया था,”मैंने अपने पिता जी को गाड़ी स्टार्ट करते तो देखा था। मगर दाहिने या बाएं मोड़ते हुए या रोकते हुए नहीं देखा था। इसलिए जब मैंने देखा कि सामने तालाब है तो मैं गाड़ी का दरवाज़ा खोलकर कूद गया। मैंने अपनी जान तो बचा ली। लेकिन पिता जी की वो गाड़ी तालाब में गिर गई।
लंबे वक्त तक प्राण साहब ये मानते रहे थे कि उनका जन्म 12 नहीं, 22 फरवरी को हुआ था। दरअसल, प्राण साहब की बुआ ने एक दफा उन्हें बताया था कि तुम्हारा जन्म फरवरी के तीसरे सप्ताह में हुआ था। इसलिए प्राण साहब ने अपने जन्म की तारीख 22 फरवरी ही मान ली थी। अपने ड्राइविंग लाइसेंस में भी प्राण साहब ने अपनी जन्मतिथि 22 फरवरी ही लिखवाई।
लेकिन एक दिन प्राण साहब को बल्लीमारान में म्यूनिसिपालिटी के कर्मचारी रह चुके एक बुज़ुर्ग का खत मिला। उस बुज़ुर्ग ने खत में लिखा था कि उसके पास सबूत है कि प्राण साहब की जन्मतिथि 22 फरवरी नहीं 12 फरवरी है। और आखिरकार एक दिन उसने इस बात का सबूत प्राण साहब को दे ही दिया कि उनका जन्म 12 फरवरी है, ना कि 22 फरवरी। इस तरह प्राण साहब के जन्म की तारीख को लेकर हुई गलतफहमी दूर हुई।
प्राण, जिनका पूरा नाम था कृष्ण सिकंद। प्राण का जन्म दिल्ली के बल्लीमारान इलाके में रहने वाले एक अमीर परिवार में हुआ था। इनके पिता का नाम लाला केवल कृष्ण सिकंद और माता का नाम रामेश्वरी था। प्राण सात भाई-बहन थे। तीन बहनें और चार भाई। प्राण से छोटे इनके एक भाई कृपाल कृष्ण थे।
बाकि सभी भाई-बहन प्राण से बड़े ही थे। मूल रूप से प्राण साहब के पिता केवल कृष्ण पंजाब के रहने वाले थे। वो एक ज़मींदार परिवार से थे। प्राण के पुश्तैनी गांव का नाम था भारोवल, जो पंजाब के होशियारपुर शहर के पास मौजूद है। बचपन में अपने पिता के साथ प्राण अपने गांव जाते रहते थे।
प्राण के पिता केवल कृष्ण एक सिविल इंजीनियर थे। वो एक बड़े सरकारी ठेकेदार भी थे। चूंकि उनका काम बहुत अच्छा था तो किसी चीज़ की कोई परेशानी परिवार को कभी नहीं रही थी। लाला केवल कृष्ण को अक्सर पुलों और सड़कों के निर्माण के लिए देश के अलग-अलग शहरों में जाना पड़ता था।
सो उनका परिवार भी उनके साथ हर उस जगह जाता था जहां लाला केवल कृष्ण को जाना पड़ता था। कभी वो अपने परिवार को लेकर कपूरथला गए तो कभी उन्नाव। कभी मेरठ तो कभी देहरादून और कभी रामपुर। इतने शहरों में रहने के चलते प्राण साहब की स्कूलिंग भी कई स्कूलों में हुई थी। प्राण साहब ने मैट्रिक की परीक्षा रामपुर के रज़ा हाई स्कूल से पास की थी।
देश के अलग-अलग हिस्सों में ज़िंदगी गुज़राने की वजह से प्राण साहब का परिवार जीवन में स्थिरता की कमी महसूस करता था। लेकिन प्राण को इसका एक फायदा भी हुआ। छोटी उम्र में ही प्राण ने लोगों की अलग-अलग मुख मुद्राएं और बात करने के अलग-अलग तौर तरीके देखे लिए। बचपन के ये सब तजुर्बे प्राण साहब के अवचेतन मन में बस गए। जो आखिरकार अभिनय जगत में आने के बाद उनके बड़े काम आए।
आज प्राण साहब का जन्मदिवस है साथियों। 12 फ़रवरी 1920 को दिल्ली में प्राण साहब का जन्म हुआ था। प्राण साहब को नमन। शत शत नमन। #Pransaab #ActorPran