
प्रकाश मेहरा ने जब ज़ंजीर फ़िल्म के लिए प्राण साहब को साइन किया था, उसी वक्त स्वर्गीय मनोज कुमार ने भी अपनी फ़िल्म शोर पर काम शुरू कर दिया था। शोर में खान बादशाह नाम का एक किरदार था जिसे मनोज कुमार प्राण साहब से कराना चाहते थे। इसलिए एक दिन वो प्राण साहब से उस खान बादशाह किरदार के लिए बात करने आए। प्राण साहब ने उनकी पूरी बात सुनी। और फिर बड़ी विनम्रता से उन्होंने खान बादशाह का किरदार निभाने से मना कर दिया।
प्राण साहब ने मनोज कुमार जी से कहा,”अगर प्रकाश मेहरा ज़ंजीर फ़िल्म बनाने का इरादा छोड़ दें, तो ही मैं आपकी फ़िल्म में काम कर सकूंगा। और ये कभी होने वाला नहीं है।” आप सोच रहे होंगे कि प्राण साहब क्यों मनोज कुमार की फ़िल्म शोर में काम नहीं करना चाहते थे। तो इसकी वजह ये है कि ज़ंजीर का शेर खान और मनोज कुमार जी की शोर का खान बादशाह, दोनों लगभग एक जैसे ही किरदार थे। और एक ही वक्त पर दो फ़िल्मों में एक जैसा किरदार निभाना प्राण साहब को सही नहीं लग रहा था।
साल 1989 में प्राण साहब ने सिने ब्लिट्ज नामक एक फ़िल्म पत्रिका को इंटरव्यू दिया था। उस इंटरव्यू में प्राण साहब ने बताया था कि जब उन्होंने मनोज कुमार के डायरेक्शन में बनी उपकार व पूरब और पश्चिम में काम किया था तो उन्हें बड़ा आनंद आया था। उपकार ही वो फ़िल्म थी जिसने प्राण साहब की छवि को पूरी तरह से बदल दिया था। उन्हें खलनायक से चरित्र अभिनेता के तौर पर स्थापित कर दिया था। मगर जब प्राण ने मनोज कुमार की शोर में काम करने से मना किया तो मनोज कुमार को वो अच्छा नहीं लगा।
मनोज कुमार ने प्राण साहब के साथ उसके बाद सिर्फ़ एक ही फ़िल्म में काम किया। वो फ़िल्म थी 10 नंबरी। उसके अलावा बाद में किसी और फ़िल्म में मनोज कुमार ने प्राण के साथ काम नहीं किया। साल 1975 में आई सन्यासी फ़िल्म में प्राण और मनोज कुमार साथ ज़रूर दिखे थे। लेकिन वो मनोज कुमार की नहीं, सोहनलाल की फ़िल्म थी। सोहनलाल ने ही वो सन्यासी फ़िल्म को डायरेक्ट व प्रोड्यूस किया था।
मनोज कुमार जी ने भी एक दफ़ा एक इंटरव्यू में प्राण साहब के साथ फ़िल्म ना करने वाले मामले पर बात की थी। मनोज कुमार ने उस घटना को याद करते हुए कहा था कि जब मैंने प्राण साहब को शोर की कहानी सुनाई तो उन्होंने कहा कि इसमें एक समस्या है। प्रकाश मेहरा की फ़िल्म में भी मैं बिल्कुल ऐसा ही रोल निभाने जा रहा हूं। और मैं प्रकाश मेहरा के साथ कॉन्ट्रैक्ट भी साइन कर चुका हूं। अगर आप अपनी फ़िल्म शोर में खान बादशाह के किरदार को किसी और से बदल लें तो दिक्कत खत्म हो जाएगी।
उस इंटरव्यू में मनोज कुमार जी ने ये भी बताया था कि प्राण साहब के जवाब की प्रतिक्रिया में उन्होंने कहा था कि मैं आपकी डेडिकेशन की तारीफ़ करता हूं प्राण साहब। लेकिन जिस तरह आप प्रकाश मेहरा से वचनबद्ध हैं, ठीक वैसे ही मैं अपनी स्क्रिप्ट के साथ वचनबद्ध हूं। मैं अपनी स्क्रिप्ट नहीं बदल सकता। इसलिए बात खत्म करते हैं। हममें से कोई भी इस बात का बुरा नहीं मानेगा।
जब प्राण साहब की तरफ़ से मना हो गई तो मनोज कुमार ने शोर के खान बादशाह का रोल प्रेमनाथ जी को ऑफ़र किया, जिसे प्रेमनाथ जी ने स्वीकार भी कर लिया। लेकिन इसी दौरान किसी ने फ़िल्म इंडस्ट्री में ये बात फ़ैला दी कि प्राण साहब और मनोज कुमार के रिश्ते बिगड़ गए हैं। उनकी दोस्ती खत्म हो गई है।
लेकिन मनोज कुमार ने इस पर रिएक्ट करते हुए उसी इंटरव्यू में कहा था ऐसा कुछ नहीं था। शोर का किरदार निभाने से इन्कार करने के तीन दिनों के बाद प्राण साहब मनोज कुमार जी के घर गए थे। उस दिन मनोज कुमार जी ने प्राण को 10 नंबरी फ़िल्म की कहानी सुनाई थी। और आगे चलकर प्राण साहब ने 10 नंबरी फ़िल्म में काम किया भी था। #Pransaab #ManojKumar
