
बॉलीवुड की चकाचौंध भरी दुनिया जितनी रंगीन दिखती है, उतनी ही बेरहम भी है। इस कड़वे सच की सबसे दर्दनाक मिसालों में से एक हैं Mahesh Anand।
आज उनकी डेथ एनिवर्सरी है। 9 फरवरी 2019 को मुंबई के उनके फ्लैट से उनकी सड़ी-गली लाश मिली थी। तीन दिन तक किसी को भनक तक नहीं लगी कि एक समय का चर्चित अभिनेता इस दुनिया से जा चुका है।
मॉडलिंग से फिल्मों तक का सफर
महेश आनंद एक प्रभावशाली पर्सनैलिटी के मालिक थे। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत मॉडलिंग से की थी।
बेहतरीन डांसिंग स्किल्स और फिट बॉडी की वजह से उन्हें जल्दी पहचान मिलने लगी। मॉडलिंग और डांस के जरिए फिल्मों तक पहुंचना उनके लिए आसान हो गया।
उनकी पहली फिल्म ‘सनम तेरी कसम’ थी, जिसे एक्ट्रेस बरखा रॉय ने प्रोड्यूस किया था। हालांकि इस फिल्म में महेश आनंद का चेहरा नहीं, बल्कि एक डांसर की परछाई दिखाई गई थी—और वही परछाई महेश आनंद की थी।
पहली ऑन-स्क्रीन मौजूदगी और हीरो बनने की कोशिश
1984 में आई फिल्म ‘करिश्मा’ में महेश आनंद पहली बार कैमरे के सामने नजर आए।
हालांकि रोल छोटा था, लेकिन उनका डांस और स्क्रीन प्रेज़ेंस लोगों को पसंद आया।
1986 में फिल्म ‘सस्ती दुल्हन महंगा दूल्हा’ के जरिए उन्होंने बतौर हीरो अपनी पहचान बनाने की कोशिश की। फिल्म को ठीक-ठाक प्रतिक्रिया मिली, लेकिन दुर्भाग्यवश महेश आनंद को वह मुकाम नहीं मिल पाया जिसकी उन्हें तलाश थी।
साइड विलेन बनकर सिमटता करियर
समय के साथ अच्छे लीड रोल मिलना बंद हो गया।
नतीजा यह हुआ कि महेश आनंद को मुख्य विलेन के साइडकिक या सेकेंडरी नेगेटिव रोल करने पड़े।
वह अपने स्टंट्स खुद किया करते थे, लेकिन इंडस्ट्री में टाइपकास्टिंग और बदलते ट्रेंड्स ने उनके करियर को सीमित कर दिया।
यहीं से उनके जीवन का संघर्ष और गहराता चला गया।
पांच शादियां और टूटा निजी जीवन
महेश आनंद की निजी जिंदगी भी उतनी ही उथल-पुथल भरी रही जितना उनका करियर।
पहली शादी: बरखा रॉय (तलाक) दूसरी शादी: मॉडल एरिका रॉय डिसूजा (एक बेटा – त्रिशूल, तलाक के बाद बेटा कनाडा चला गया) तीसरी शादी: एक्ट्रेस मधू मल्होत्रा चौथी शादी: एक्ट्रेस उषा बचानी पांचवीं शादी (2015): बेलारूसी महिला लाना
हर शादी के साथ उन्हें उम्मीद थी कि जीवन स्थिर होगा, लेकिन हर रिश्ता टूटता चला गया।
जब उनकी मृत्यु हुई, तब उनकी पत्नी लाना भारत में मौजूद नहीं थीं।
मौत के बाद भी तन्हाई
9 फरवरी 2019 को जब उनके फ्लैट से बदबू आने लगी, तब पड़ोसियों ने पुलिस को सूचना दी।
तब पता चला कि महेश आनंद की मौत तीन दिन पहले हो चुकी थी।
यह वही इंसान था जिसने दर्जनों फिल्मों में काम किया, लेकिन आखिरी समय में कोई साथ नहीं था।
लाना को जब खबर मिली, तो वह बेलारूस से भारत आईं और अंतिम संस्कार कराकर वापस चली गईं।
बॉलीवुड के क्रूर चेहरे की मिसाल
महेश आनंद की कहानी सिर्फ एक अभिनेता की नहीं है, बल्कि उस सिस्टम की है—
जहां चमक खत्म होते ही लोग भुला दिए जाते हैं।
उन्होंने जिंदगी में संघर्ष, असफलता, अकेलापन और मानसिक दबाव—सब कुछ झेला।
उनकी मौत आज भी बॉलीवुड की सबसे दुखद और चौंकाने वाली घटनाओं में गिनी जाती है।
निष्कर्ष
महेश आनंद ने फिल्मों में भले ही साइड विलेन का किरदार निभाया हो, लेकिन उनकी असली जिंदगी की कहानी किसी ट्रैजेडी फिल्म से कम नहीं थी।
आज उनकी डेथ एनिवर्सरी पर उन्हें याद करना सिर्फ श्रद्धांजलि नहीं, बल्कि उस सच्चाई को स्वीकार करना है जिसे अक्सर ग्लैमर के पीछे छुपा दिया जाता है।
⚠️ Disclaimer
यह लेख मीडिया रिपोर्ट्स, सार्वजनिक जानकारियों और उपलब्ध इंटरव्यू पर आधारित है। इसका उद्देश्य किसी की निजी छवि को नुकसान पहुंचाना नहीं, बल्कि एक कलाकार के जीवन की सच्ची कहानी को स्मरण के रूप में प्रस्तुत करना है।
