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जब ‘कभी कभी’ को फ्लॉप बताया गया था: यश चोपड़ा की वो फ़िल्म जिसने इतिहास रच दिया

  • February 28, 2026

ये फ़िल्म नहीं चलेगी। इसका संगीत अच्छा है। कहानी भी अच्छी है। लेकिन मूंछों वाला अमिताभ, दीवार जैसी हिट फ़िल्म के बाद बिना एक्शन सीन्स करता अमिताभ, शायरी करता अमिताभ, बेटी का बाप अमिताभ लोगों को पसंद नहीं आएगा। ये फ़िल्म नहीं चलने वाली है।” गुलशन राय ने उस फ़िल्म का ट्रायल देखकर का ट्रायल देखने के बाद यश चोपड़ा से कहा। यश चोपड़ा टेंशन में आ गए थे उनकी ये बात सुनकर।

वो फ़िल्म थी कभी-कभी, जो रिलीज़ हुई थी आज से ठीक 50 साल पहले, 27 फरवरी 1976 के दिन। तो साथियों आज पढ़िए म्यूज़िकल क्लासिक ‘कभी कभी’ के बनने के दौरान की कुछ रोचक कहानियां। लेख ज़रा लंबा है। लेकिन जानकारियों से भरपूर है। पसंद आएगा आपको। पूरा पढ़िएगा। और आखिरी में इस फ़िल्म के बारे में, इस लेख के बारे में कोई टिप्पणी भी कीजिएगा। लाइक-शेयर तो कर ही दीजिएगा। स्टार्ट करते हैं।

जब यश चोपड़ा के प्रोडक्शन हाउस की पहली फ़िल्म दाग कामयाब हो गई तो उन्होंने एक और कहानी पर फ़िल्म बनाने की प्लानिंग की। और वो फ़िल्म यश चोपड़ा बनाना चाहते थे राखी के साथ। मगर उस फ़िल्म पर काम शुरू होता उससे पहले ही राखी ने गुलज़ार से शादी कर ली और नई फ़िल्में साइन करना बंद कर दिया। राखी मन बना चुकी थी कि शादी के बाद वो फ़िल्मों में काम नहीं करेंगी।

राखी फ़िल्म में काम करें इसके लिए यश चोपड़ा गुलज़ार से बात करने गए। यश चोपड़ा ने गुलज़ार को बताया कि उनकी फ़िल्म में जो रोल वो राखी से कराना चाहते हैं, कोई और एक्ट्रेस उस रोल के लिए उन्हें फिट नहीं लग रही है। गुलज़ार ने यश चोपड़ा की बात मान ली और राखी को यश चोपड़ा की अगली फ़िल्म में काम करने की परमिशन दे दी।

ऐसा बहुत जगहों पर बताया जाता है कि राखी ने गुलज़ार से ब्रेकअप होने के बाद ‘कभी-कभी’ फ़िल्म में काम किया था। लेकिन यश चोपड़ा ने स्वंय ये बात एक इंटरव्यू में बताई थी कि उन्होंने राखी को उनकी इस फ़िल्म में काम करने की परमिशन देने की गुज़ारिश गुलज़ार से की थी, जिसे गुलज़ार ने मान भी लिया था। हालांकि जब तक ‘कभी कभी’ रिलीज़ हुई थी, तब तक गुलज़ार और राखी अलग हो चुके थे।

‘कभी कभी’ फ़िल्म के गीतकार थे साहिर लुधियानवी। और संगीत कंपोज़ किया था खय्याम ने। इस फ़िल्म का गीत-संगीत बहुत सराहा जाता है। खय्याम और साहिर, दोनों को 24वें फ़िल्मफ़ेयर अवॉर्ड्स में बेस्ट म्यूज़िक डायरेक्टर व बेस्ट लिरिसिस्ट अवॉर्ड दिया गया था। साहिर को ‘कभी कभी मेरे दिल में’ गीत के लिए बेस्ट लिरिसिस्ट अवॉर्ड मिला था। इसी गीत के लिए मुकेश जी को बेस्ट मेल प्लेबैक सिंगर अवॉर्ड दिया गया था। जबकी ‘कभी कभी’ फ़िल्म के डायलॉग्स के लिए सागर सरहदी साहब को बेस्ट डायलॉग लेखक का फ़िल्मफ़ेयर अवॉर्ड मिला था।

कुछ लोग कहते हैं कि ‘कभी कभी’ फ़िल्म की कहानी साहिर लुधियानवी की निजी ज़िंदगी से प्रेरित थी। हालांकि यश चोपड़ा ने कभी इस बात को सही नहीं बताया। यश चोपड़ा ना सिर्फ़ साहिर के बड़े फ़ैन थे, बहुत अच्छे दोस्त भी थे। 1940 के दशक में साहिर लुधियानवी की शायरी की पहली किताब छपी थी। उस किताब का नाम था ‘तल्ख़ियां।’ यश चोपड़ा ने वो किताब पढ़ी थी। और उसी किताब में ‘कभी कभी’ नाम की एक पोएम थी, जो यश चोपड़ा को बहुत पसंद थी। यश चोपड़ा उस पोएम को अपनी किताब में इस्तेमाल करना चाहते थे। इस फ़िल्म का टाइटल ‘कभी कभी’ यश चोपड़ा ने साहिर की उसी पोएम से लिया था।

यश चोपड़ा शुरुआत में ही तय कर चुके थे कि ‘कभी कभी’ में मुख्य किरदार निभाने के लिए वो अमिताभ बच्चन और शशि कपूर को ही कास्ट करेंगे। शुरुआत में इस फ़िल्म की कहानी थी कि शायर और उसकी प्रेमिका अपने माता-पिता की वजह से अपनी मुहब्बत कुर्बान कर देते हैं। मगर बहुत साल बाद दोनों फिर से मिलते हैं। और कहानी में कई उतार-चढ़ाव आते हैं।

उस वक्त की कुछ फ़िल्म मैगज़ीन्स ने लिखा था कि यश चोपड़ा ने अमिताभ बच्चन की पत्नी के रोल के एक्ट्रेस नूतन से बात की है। मगर नूतन ने इस बात को खारिज कर दिया था। नूतन ने कहा था कि यश चोपड़ा कभी उनके पास ‘कभी कभी’ फ़िल्म का ऑफ़र लेकर आए ही नहीं। यश चोपड़ा ने वहीदा रहमान से अमिताभ की पत्नी का रोल निभाने की बात की थी, जिसके लिए वहीदा जी फौरन तैयार हो गई थी। इसी दौरान ही दीवार फ़िल्म में वहीदा जी को अमिताभ-शशि कपूर की मां का रोल भी ऑफ़र हुआ था। मगर उन्होंने इन्कार कर दिया था, जिसके बाद वो रोल निरूपा रॉय जी को मिला था।

यश चोपड़ा की पत्नी पामेला चोपड़ा ने एक आर्टिकल पढ़ा था। उस आर्टिकल में एक औरत और उसके गोद लिए हुए बच्चे(एक लड़की) के बारे में लिखा था। पामेला चोपड़ा को वो आर्टिकल पसंद आया। उन्होंने यश चोपड़ा को भी वो आर्टिकल दिखाया। और यूं ‘कभी कभी’ फ़िल्म की कहानी का सब-प्लॉट तैयार हुआ। यही सब-प्लॉट फ़िल्म में एक पॉइन्ट पर आकर मेन कहानी बन जाता है।

‘कभी कभी’ में गोद ली हुई लड़की का रोल एक्ट्रेस नीतू सिंह ने निभाया था। और परीक्षित साहनी व सिमी गरेवाल ने नीतू सिंग के फोस्टर पेरेंट्स का किरदार जिया था। गोद ली हुई लड़की के उस रोल के लिए यश चोपड़ा की पहली पसंद एक्ट्रेस परवीन बाबी थी। मगर किन्हीं वजहों से परवीन बाबी को फ़िल्म से निकाल दिया गया और उनकी जगह नीतू सिंह को कास्ट कर लिया गया। परवीन बाबी इस वजह से यश चोपड़ा को खूब कॉल्स कर रही थी। मगर यश चोपड़ा उनसे बात ही नहीं कर रहे थे।

आखिरकार एक दिन परवीन बाबी यश चोपड़ा के घर ही पहुंच गई। वहां परवीन ने यश चोपड़ा से कहा कि ठीक है मुझे फ़िल्म से आपने निकाल दिया। मगर मुझे अवॉइड क्यों कर रहे हैं आप? मुझे बता तो देते। अगर भविष्य में कभी मेरे लायक कोई रोल हो तो बेझिझक आप मुझसे संपर्क कीजिएगा। यश चोपड़ा को बहुत दुख हुआ। मगर बाद में उन्होंने काला पत्थर फ़िल्म में परवीन बाबी को कास्ट करके अपने उस दुख को खत्म किया।

नीतू सिंह को फाइनल करने के बाद यश चोपड़ा को तलाश थी एक ऐसे लड़के की जो नीतू के बॉयफ्रेंड का रोल निभा सके। और उस वक्त ऋषि कपूर इकलौता चेहरा थे जो यश चोपड़ा को सही लग रहे थे बॉयफ्रेंड के उस रोल के लिए। मगर जब ऋषि कपूर से उन्होंने बात की तो ऋषि कपूर ने वो रोल निभाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। ऋषि कपूर को लग रहा था कि जिस फ़िल्म में अमिताभ और शशि कपूर जैसे बड़े स्टार हैं उसमें मेरे लिए करने को क्या होगा?

ऋषि कपूर ने यश चोपड़ा को ये सलाह भी दी कि अगर गोद लिए हुए बच्चे को बेटी की जगह बेटा कर दिया जाए तो वो इस फ़िल्म में काम ज़रूर करेंगे। यानि ऋषि चाहते थे कि नीतू सिंह की जगह उन्हें फ़िल्म में लिया जाए। मगर यश चोपड़ा उस रोल को लड़की से लड़के में बदल नहीं सकते थे। क्योंकि कहानी के हिसाब से वो रोल लड़की वाला ही था। अगर यश चोपड़ा उसे बदलने की कोशिश भी करते तो मूल कहानी में उन्हें बहुत से बदलाव करने पड़ते।

आखिरकार ऋषि कपूर के अंकल शशि कपूर ने उन्हें समझाया कि रोल अच्छा है। चाचा के कहने पर ऋषि कपूर वो रोल निभाने को राज़ी हो गए। उन्हीं दिनों ऋषि कपूर को विदेश जाना था, अपनी फ़िल्म बारूद की शूटिंग के लिए। विदेश जाने से दो दिन पहले ऋषि कपूर शशि कपूर के साथ ‘कभी कभी’ के सेट पर पहुंचे। और उन्हीं दो दिनों में यश चोपड़ा ने ऋषि कपूर के बहुत से सीन्स शूट कर लिए।

दो दिनों बाद ऋषि कपूर बारूद की शूटिंग के लिए विदेश चले गए। मगर इस दौरान नीतू सिंह को वो मिस करने लगे। ‘कभी कभी’ की शूटिंग कश्मीर में चल रही थी। नीतू सिंह भी कश्मीर में ही थी। विदेश से ही ऋषि कपूर ने नीतू सिंह को एक टैलिग्राम भेजा था, जिसमें उन्होंने लिखा था कि ‘सिक्खणी बहुत याद आ रही है।’ ऋषि कपूर के उस टैलिग्राम से नीतू सिंह बहुत खुश हुई थी। वो सबको ऋषि कपूर का टैलिग्राम दिखा रही थी।

यश चोपड़ा ने अपने प्रोडक्शन हाउस यशराज फ़िल्म्स के पहले प्रोजेक्ट ‘दाग’ में लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल से काम लिया था। ‘कभी कभी’ के संगीत के लिए भी यश चोपड़ा लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल को ही साइन करना चाहते थे। कहा जाता है कि चूंकि लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल बहुत बिज़ी थे तो वो यश चोपड़ा के इस प्रोजेक्ट का हिस्सा नहीं बन सके।

एक दूसरा वर्ज़न इस स्टोरी का ये है कि ये साहिर लुधियानवी थे जिन्होंने यश चोपड़ा को खय्याम का नाम सजेस्ट किया था। साहिर और खय्याम बहुत अच्छे दोस्त थे। साहिर ने यश चोपड़ा से कहा था कि अगर मेरी इस पोएम को आप अपनी फ़िल्म में इस्तेमाल करना चाहते हैं तो संगीतकार कोई ऐसा होना चाहिए जिसे उर्दू शायरी की तगड़ी समझ हो। संगीतकार ऐसा होना चाहिए जो इन पोएम्स को जब धुनों में पिरोए तो वो कोई रूटीन फ़िल्मी सॉन्ग्स ना लगें।

‘कभी कभी’ के मशहूर टाइटल गीत से जुड़ी एक रोचक कहानी ये भी है कि खय्याम इस गीत को एक बार पहले भी, किसी और फ़िल्म के लिए रिकॉर्ड कर चुके थे। वो फ़िल्म चेतन आनंद बना रहे थे। उस फ़िल्म का नाम काफ़िर। उस फ़िल्म में देव आनंद, बलराज साहनी, प्रिया राजवंश और गीता बाली थे। खय्याम ही उस फ़िल्म के संगीतकार थे। जबकी गीतकार साहिर थे।

खय्याम ने उस फ़िल्म के लिए एक गीत कंपोज़ किया था जिसके बोल थे ‘कभी कभी मेरे दिल में ख्याल आता है।’ खय्याम ने ये गीत गीता दत्त और सुधा मल्होत्रा से रिकॉर्ड कराया था। ये फ़िल्म पूरी बन पाती उससे पहले ही गीता बाली की डेथ हो गई। जिसके बाद चेतन आनंद को वो फ़िल्म बंद करनी पड़ गई।

जब यश चोपड़ा ‘कभी कभी’ बना रहे थे तब चेतन आनंद से अनुमति लेकर साहिर लुधियानवी ने अपनी वो पोएम यश चोपड़ा को दे दी। ‘कभी कभी’ का टाइटल गीत बनकर जब वो पोएम हिट हो गई तो चेतन आनंद ने एक दिन खय्याम और साहिर को कॉपीराइट उल्लंघन करने का लीगल नोटिस भेज दिया था। हालांकि बाद में वो मामला सेटल कर लिया गया था।

जिस वक्त ‘कभी कभी’ रिलीज़ हुई थी उस वक्त खय्याम साहब का करियर बहुत खास नहीं चल रहा था। मगर साहिर के कहने पर यश चोपड़ा ने खय्याम को इस फ़िल्म के म्यूज़िक डायरेक्टर के तौर पर साइन कर लिया। यश चोपड़ा ने जब घोषणा कर दी कि ‘कभी कभी’ के म्यूज़िक डायरेक्टर खय्याम होंगे, उसके कुछ दिनों बाद अमिताभ बच्चन के घर पर एक पार्टी चल रही थी। उस पार्टी में यश चोपड़ा भी थे। और शम्मी कपूर भी आए हुए थे। शम्मी कपूर और यश चोपड़ा के बीच बातचीत होने लगी। उसी बातचीत में शम्मी कपूर ने कहा कि शायरी को धुनों में बांधने के लिए जैसा संगीतकार चाहिए, तुमने वैसा ही संगीतकार चुना है।

कभी-कभी फ़िल्म पर काम करने के दौरान ही यश चोपड़ा ने दीवार फ़िल्म पर भी काम शुरू कर दिया था। कई बार ऐसा हुआ था जब यश चोपड़ा इन दोनों फ़िल्मों की शूटिंग लगभग साथ ही कर रहे थे। मगर दीवार कभी कभी से पहले ही रिलीज़ हो गई थी। जबकी ‘कभी कभी’ 1976 में आई। यश चोपड़ा इस फ़िल्म के बारे में कहते थे कि ये वो फ़िल्म है जिसे बनाते वक्त उन्हें सबसे ज़्यादा आनंद आया था।

जब कश्मीर में इस फ़िल्म की शूटिंग चल रही थी तब लगभग सभी कलाकारों के परिवार के लोग भी वहां मौजूद थे। राखी और शशि कपूर की शादी के सीन में अमिताभ बच्चन के माता-पिता भी नज़र आए थे। शादी के उस सीन में सभी लोग बिल्कुल तैयार होकर शामिल हुए थे। लग रहा था मानो सच में कोई शादी हो रही हो। अमिताभ की पत्नी जया बच्चन भी कश्मीर में थी। फ़िल्म में तो जया बच्चन का कोई काम नहीं था। लेकिन उन्होंने यश चोपड़ा को बहुत असिस्ट किया था। वहीदा रहमान के पति शशि रेखी उर्फ़ कमलजीत भी मौजूद थे। ये सब देखकर कुछ लोग तो मज़ाक में यश चोपड़ा से कहते थे कि आपने हनीमून कैंप ही बना दिया है।

पहले यश चोपड़ा ने कभी-कभी फ़िल्म की शुरुआत एकदम अलग तरीके से रखी थी। पहले यश चोपड़ा दिखा रहे थे कि शुरुआत में ही राखी और शशि कपूर की शादी हो रही है। जबकी अमिताभ बच्चन दूर खड़े उस शादी को देख रहे हैं। शशि कपूर और राखी के फेरे होते हैं। और हर फेरे के बाद फ्लैशबैक में अमिताभ-राखी के रोमांस के सीन्स हैं। यानि सात फेरों पर सात रोमांटिक सीन्स। उस दौर में ये बहुत अलग तरह की शुरुआत थी।

फ़िल्म की ये शुरुआत पूरी शूट करने के बाद जब यश चोपड़ा मुंबई वापस लौट आए और फ़िल्म के बैकग्राउंड म्यूज़िक पर काम करने लगे तो एक दिन गुलशन राय उनसे मिलने आए। गुलशन राय ही इस फ़िल्म के फाइनेंसर थे। यशराज फ़िल्म्स की पहली फ़िल्म ‘दाग’ को भी उन्होंने ही फाइनेंस किया था। यश चोपड़ा ने गुलशन राय को ‘कभी कभी’ का ट्रायल दिखाया। गुलशन राय ने पूरा ट्रायल देखा। फिर बिना कुछ बोले ही वो वहां से जाने लगे। यश चोपड़ा ने उनसे प्रतिक्रिया देने को कहा। गुलशन राय बोले कि मेरे घर आओ डिनर पर। फिर बात करते हैं।

अगले दिन यश चोपड़ा अपनी पत्नी पामेला चोपड़ा को साथ लेकर गुलशन राय के घर पहुंच गए। वहां गुलशन राय ने यश चोपड़ा से कहा,”ये फ़िल्म नहीं चलेगी। इसका संगीत तो अच्छा है। कहानी भी अच्छी है। लेकिन मूंछों वाला अमिताभ, दीवार जैसी हिट फ़िल्म के बाद बिना एक्शन सीन्स करता अमिताभ, शायरी करता अमिताभ, बेटी का बाप अमिताभ लोगों को पसंद नहीं आएगा। ये फ़िल्म नहीं चलने वाली है।” यश चोपड़ा टेंशन में आ गए।

मंगेश देसाई नाम के एक रिकॉर्डिस्ट हुआ करते थे जो उस वक्त फ़िल्म इंडस्ट्री का बहुत बड़ा नाम थे। मंगेश देसाई यश चोपड़ा के भी अच्छे दोस्त थे। यश चोपड़ा ने मंगेश देसाई से बात की। मंगेश देसाई को पूरी सिचुएशन समझाई और अपनी चिंता भी बताई। तब मंगेश देसाई बोले कि आप किसी की बातों पर ध्यान मत दो। ये फ़िल्म ज़रूर चलेगी। आपको बस इसकी शुरुआत बदलनी होगी। आप जिस आर्टिस्टिक तरीके से इस फ़िल्म को स्टार्ट कर रहे हो, वैसे मत करो। बिल्कुल सामान्य शुरुआत करो। ऑडियंस को शुरुआत में ही बता दो कि अमिताभ और राखी आपस में मुहब्बत करते हैं। बाद में दिखाओ की राखी की शादी किसी और से हो जाती है।

मंगेश देसाई की बात यश चोपड़ा को समझ आई। लगभग एक सप्ताह बाद वो कुछ लोगों को साथ लेकर फिर से फ्लाइट लेकर कश्मीर गए। ढाई दिन तक शूटिंग करने के बाद यश चोपड़ा मुंबई वापस लौट आए। आते ही उन्होंने फ़िल्म की फाइनल एडिटिंग कर दी। और फ़िल्म को रिलीज़ भी कर दिया। फ़िल्म के फाइनेंसर गुलशन राय, जो मान ही चुके थे कि ये फ़िल्म नहीं चलने वाली है, वो इस फ़िल्म के रिलीज़ होने से पहले ही महाबलेश्वर चले गए। ताकि खुद को टेंशन से दूर रख सकें।

मगर उत्तर भारत से ‘कभी कभी’ को बढ़िया रेस्पॉन्स मिल रहा था। मुंबई से लगभग एक सप्ताह बाद ऑडियंस का रेस्पॉन्स मिलना शुरू हुआ। मेट्रो सिनेमा के मैनेजर ने यश चोपड़ा को फोन करके अपने ऑफ़िस मिलने के लिए बुलाया। यश चोपड़ा जब मेट्रो सिनेमा पहुंचे तो मैनेजर ने कहा कि अब बात बन गई है। लोग फ़िल्म देखने आने लगे हैं। और फ़िल्म सबको पसंद भी आ रही है।

इस फ़िल्म के गीतों तो कहना ही क्या। एक से एक क्लासिक गीत खय्याम साहब ने तैयार किए। इसी फ़िल्म में ऋषि कपूर-नीतू सिंह व एक्ट्रेस नसीम पर भी गीत फ़िल्माए गए थे, जो उस समय के हिसाब से बहुत यूथफुल थे। इस तरह खय्याम साहब ने साबित कर दिया था कि उनके म्यूज़िक का दायरा काफी विस्तृत है। फ़िल्म का टाइटल गीत ‘कभी कभी मेरे दिल में’ बिनाका गीतमाला 1976 की एनुअल लिस्ट में टॉप पर रहा था। जबकी इसी फ़िल्म का गीत ‘मैं पल दो पल का शायर हूं।’ सातवीं पॉजिशन पर रखा गया था।

फ़िल्म के सभी कलाकारों ने भी शानदार अभिनय किया था। यश चोपड़ा ने कहानी का क्रेडिट अपनी पत्नी पामेला चोपड़ा को दिया था। डायलॉग्स व स्क्रीनप्ले सागर सरहदी ने लिखे थे। बजट था इस फ़िल्म का 1 करोड़ 40 लाख रुपए। और कलैक्शन रहा था 3 करोड़ 60 लाख रुपए। ये फ़िल्म हिट साबित हुई थी। विकीपीडिया पर मौजूद लिस्ट के अनुसार 1976 की टॉप 05 फ़िल्मों की लिस्ट में ‘कभी कभी’ तीसरे स्थान पर रही थी। नंबर वन थी नागिन। नंबर टू थी लैला मजनू। ‘कभी कभी’ के बाद चौथे स्थान पर दस नंबरी थी। और पांचवे पायदान पर रही थी हेरा फेरी।

ये लेख यहां खत्म होता है साथियों। अगर आपने पूरा पढ़ा है तो मुझे भी बताइएगा। और लाइक-शेयर तो कमस-कम करके जाइएगा। धन्यवाद। आखिर में एक और बात। मैं बिना रीचैक किए ये स्टोरी पोस्ट कर रहा हूं। अगर कोई शाब्दिक या भाषाई गलती कहीं पर दिखे तो मुझे कमेंट करके बता दीजिएगा। मैं उसे सही कर दूंगा। आप लोगों से मिलने वाला ये भी एक तरह का सपोर्ट ही है। आभार आप सभी का इसके लिए। #50yearsofkabhikabhi #kabhikabhi1976 #trivia