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फर्श पर बैठकर साइन हुआ कॉन्ट्रैक्ट: कैसे कभी हां कभी ना बनी शाहरुख़ खान की सबसे ख़ास फ़िल्म

  • February 25, 2026

जब निर्देशक कुंदन शाह ने कभी हां कभी ना की स्क्रिप्ट पूरी की, तब उन्होंने सोचा भी नहीं था कि यह फिल्म आगे चलकर शाहरुख खान के करियर की सबसे आत्मीय और निजी फिल्मों में गिनी जाएगी। यह उस दौर की बात है, जब शाहरुख अभी सुपरस्टार नहीं बने थे, लेकिन उनकी प्रतिभा को पहचानने वाले लोग समझ चुके थे कि यह लड़का कुछ अलग है।

एक अधूरी स्क्रिप्ट और बेचैन अभिनेता

स्क्रिप्ट पूरी होने के बाद शाहरुख खान ने कुंदन शाह से उसे पढ़ने के लिए मांगा। कुंदन शाह ने साफ कहा कि अभी कुछ बदलाव बाकी हैं और स्क्रिप्ट फाइनल नहीं है। लेकिन शाहरुख इंतज़ार करने वालों में से नहीं थे। उन्होंने ज़िद की और स्क्रिप्ट ले ही ली।

कुंदन शाह ने बस इतना कहा कि किसी भी हाल में अगली सुबह तक स्क्रिप्ट वापस चाहिए। शाहरुख ने उसी रात पूरी स्क्रिप्ट पढ़ी और अगली सुबह समय पर लौटा दी। स्क्रिप्ट पढ़ने के बाद उनका फैसला साफ था—वे कभी हां कभी ना ज़रूर करेंगे।

समस्या स्क्रिप्ट नहीं, समय था

फिल्म की शूटिंग शुरू होने से पहले ही शाहरुख खान ने कई और फिल्में साइन कर लीं। इनमें दिल आशना है और करण अर्जुन जैसी बड़ी फिल्में शामिल थीं।

यहीं से परेशानी शुरू हुई। कभी हां कभी ना के प्रोड्यूसर को डर था कि शाहरुख ने भले ही हामी भर दी हो, लेकिन अभी तक कोई लिखित कॉन्ट्रैक्ट साइन नहीं हुआ था। उस दौर में मौखिक सहमति आम बात थी, लेकिन जब अभिनेता तेजी से बड़ा होता दिखे, तो अनिश्चितता बढ़ जाती है।

दीवाना का मुहूर्त और कॉरिडोर वाला साइन

कुछ समय बाद कुंदन शाह की मुलाकात शाहरुख से दीवाना के मुहूर्त के दौरान हुई। कुंदन शाह अपने साथ एक कंसेंट लेटर लेकर आए थे।

जिस कमरे में शाहरुख बैठे थे, वहाँ इतनी भीड़ थी कि बात करना संभव नहीं था। लेकिन जब शाहरुख मुहूर्त शॉट देने के लिए बाहर निकले, तो कॉरिडोर में कुंदन शाह ने उन्हें रोक लिया। उन्होंने साफ-साफ बताया कि प्रोड्यूसर को चिंता हो रही है और कंसेंट लेटर ज़रूरी है।

शाहरुख ने पूरी बात समझी। वहाँ कोई कुर्सी नहीं थी, तो वे फर्श पर ही बैठ गए, अपनी गोद में काग़ज़ रखा और वहीं साइन कर दिए। यह क्षण बॉलीवुड इतिहास के सबसे सादे लेकिन यादगार पलों में से एक बन गया।

पाँच हज़ार एडवांस, पच्चीस हज़ार पूरी फ़ीस

उसी वक्त प्रोड्यूसर विक्रम मल्होत्रा ने शाहरुख को पाँच हज़ार रुपये एडवांस दिए। पूरी फिल्म के लिए शाहरुख की फ़ीस तय हुई—महज़ 25 हज़ार रुपये।

आज के समय में यह रकम सुनकर हैरानी होती है, लेकिन यही वो दौर था जब अभिनय जुनून से किया जाता था, ब्रांड वैल्यू से नहीं।

जब फिल्म तैयार थी, लेकिन खरीदार नहीं

कुंदन शाह ने उसी इंटरव्यू में बताया कि कभी हां कभी ना, बाज़ीगर और डर से पहले ही बनकर तैयार हो गई थी। लेकिन समस्या यह थी कि कोई भी डिस्ट्रीब्यूटर उस वक्त इस फिल्म को खरीदने के लिए तैयार नहीं था।

शाहरुख तब तक काफी व्यस्त हो चुके थे। उनकी फिल्में अच्छा प्रदर्शन कर रही थीं। ऐसे में उन्होंने खुद आगे बढ़कर फिल्म को बचाने का फैसला लिया।

शाहरुख बने फिल्म के सह-निर्माता

शाहरुख खान ने प्रोड्यूसर विजय गिलानी से बात की। विजय गिलानी इस फिल्म को खरीदने के लिए तैयार हो गए। इसके बाद वीनस फ़िल्म्स, शाहरुख खान और विजय गिलानी—तीनों ने मिलकर बॉम्बे टेरिटरी में फिल्म के राइट्स खरीदे।

यानी अगर शाहरुख आगे न आते, तो संभव है कि कभी हां कभी ना कभी दर्शकों तक पहुँच ही न पाती।

कैमरे के सामने शाहरुख का करिश्मा

शूटिंग के दौरान का एक किस्सा कुंदन शाह अक्सर बताते हैं। एक सीन में शाहरुख के साथ दीपक तिजोरी थे। टेक के बाद दीपक ने पूछा कि उनका परफॉर्मेंस कैसा था। कुंदन शाह ने कहा कि रीटेक में वे दीपक को देखेंगे।

लेकिन रीटेक में भी उनकी नज़र बार-बार शाहरुख पर ही जाती रही। यह शाहरुख की ऑन-स्क्रीन मौजूदगी का असर था।

सर्कस के सेट पर रीटेक सिर्फ़ देखने के लिए

एक और किस्सा सर्कस के सेट का है। कुंदन शाह और अज़ीज़ मिर्ज़ा ने शाहरुख से एक परफेक्ट शॉट देने के बाद भी कई रीटेक करवाए। वजह यह नहीं थी कि शॉट खराब था—बल्कि इसलिए कि वे शाहरुख को एक्टिंग करते देखना चाहते थे।

दर्शकों के बीच बैठकर फिल्म देखना

फिल्म रिलीज़ के बाद भी शाहरुख कभी हां कभी ना से जुड़े रहे। प्रमोशन के दौरान पूरी टीम हैदराबाद के एक थिएटर पहुँची। फिल्म बीच में रोकी गई, दर्शकों से बातचीत हुई, फिर फिल्म दोबारा शुरू हुई।

पूरी टीम ने दर्शकों के साथ बैठकर फिल्म देखी। दर्शकों का जोश देखकर कुंदन शाह ने शाहरुख से कहा—

“यह रिएक्शन मेरी फिल्म के लिए नहीं, तुम्हारे करिश्मे के लिए है।”

और शायद यही सच था।

कभी हां कभी ना सिर्फ़ एक फिल्म नहीं थी—यह शाहरुख खान की आत्मा के सबसे करीब की फिल्म थी।