
साल 1983 की सुपरहिट फिल्म हिम्मतवाला अपने गानों, डायलॉग्स और स्टारकास्ट के लिए जितनी मशहूर है, उतनी ही इसके सेट से जुड़ी एक घटना के लिए भी याद की जाती है—एक ऐसी घटना जिसने श्रीदेवी के मन में संजय दत्त को लेकर हमेशा के लिए डर बैठा दिया।
जब एक मुलाकात डर में बदल गई
हिम्मतवाला की शूटिंग के दौरान श्रीदेवी लगातार चर्चा में थीं। वे उस समय इंडस्ट्री की उभरती हुई स्टार थीं और हर कोई उनसे मिलना चाहता था। इसी दौरान संजय दत्त भी उनसे मिलने फिल्म के सेट पर पहुँचे। लेकिन दुर्भाग्य से, उस वक्त संजय दत्त शराब के नशे में थे।
बताया जाता है कि वे सीधे श्रीदेवी के मेकअप रूम में चले गए, जहाँ उस समय श्रीदेवी बिल्कुल अकेली थीं। यह स्थिति उनके लिए बेहद डरावनी थी। कुछ देर बाद संजय वहाँ से चले गए, लेकिन उस घटना का असर श्रीदेवी के मन पर गहरा पड़ चुका था। उस दिन के बाद श्रीदेवी की नज़र में संजय दत्त की छवि पूरी तरह बदल गई।
एक साथ काम करने से परहेज़
समय के साथ दोनों ही बड़े सितारे बन गए, लेकिन श्रीदेवी ने लगभग हमेशा संजय दत्त के साथ काम करने से इनकार किया। साल 1993 की गुमराह ही एकमात्र फिल्म थी, जिसमें श्रीदेवी ने संजय दत्त के अपोज़िट काम किया।
इसके अलावा रमेश सिप्पी की एक अधूरी फिल्म ज़मीन भी थी, जिसमें दोनों कलाकार मौजूद थे, लेकिन आमने-सामने नहीं। उस फिल्म में श्रीदेवी के अपोज़िट विनोद खन्ना थे और संजय दत्त के अपोज़िट माधुरी दीक्षित।
कहा जाता है कि श्रीदेवी ने तब भी यह शर्त रखी थी कि संजय दत्त के साथ उनके दृश्य न्यूनतम हों। यह फिल्म कभी पूरी ही नहीं हो पाई। बाद में करण जौहर की एक प्रस्तावित फिल्म शिद्दत में भी दोनों को साथ लाने की योजना थी, लेकिन शूटिंग शुरू होने से पहले ही श्रीदेवी का निधन हो गया।
43 साल पहले रिलीज़ हुई थी हिम्मतवाला
25 फ़रवरी 1983 को हिम्मतवाला रिलीज़ हुई थी। आज इस फिल्म को 43 साल पूरे हो चुके हैं। फिल्म का निर्देशन किया था के. राघवेंद्र राव ने और संगीत दिया था बप्पी लाहिरी ने।
फिल्म में जीतेन्द्र और श्रीदेवी के अलावा वहीदा रहमान, शक्ति कपूर, कादर खान, अमजद खान, असरानी जैसे कलाकार थे।
गीत लिखे थे इंदीवर ने और आवाज़ दी थी किशोर कुमार, लता मंगेशकर, आशा भोसले और एस. पी. बालासुब्रमण्यम ने।
कादर खान का कॉमेडी की ओर मोड़
हिम्मतवाला वह फिल्म थी जिसने कादर खान को कॉमेडी की ओर मोड़ दिया। इससे पहले वे ज़्यादातर विलेन के किरदार निभाते थे। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था कि जब उनके बेटे कुद्दूस खान को स्कूल में इस बात पर चिढ़ाया गया कि “तुम्हारे पापा तो फिल्म के अंत में पिटते हैं”, तब उन्होंने तय किया कि अब वे नकारात्मक भूमिकाएँ नहीं करेंगे।
कैसे बने कादर खान अभिनेता
दिलचस्प बात यह है कि कादर खान इस फिल्म में पहले सिर्फ़ डायलॉग राइटर थे। उन्होंने सभी संवाद अपनी आवाज़ में रिकॉर्ड कर निर्देशक के. राघवेंद्र राव को भेजे। जब राघवेंद्र राव ने मुनीम के डायलॉग सुने, तो वे इतने प्रभावित हुए कि कादर खान को वही किरदार निभाने की पेशकश कर दी।
श्रीदेवी की आवाज़ और एक खास तथ्य
हिम्मतवाला में श्रीदेवी की आवाज़ उनकी असली आवाज़ नहीं थी। उनके सभी संवाद कुमारी नाज़ ने डब किए थे, जो 50-60 के दशक में बेबी नाज़ के नाम से मशहूर थीं।
बॉक्स ऑफिस और असर
हिम्मतवाला ब्लॉकबस्टर साबित हुई और 1983 की चौथी सबसे सफल फिल्म बनी। इसी साल श्रीदेवी और जीतेन्द्र की जानी दोस्त, जस्टिस चौधरी और मवाली भी रिलीज़ हुईं और सफल रहीं।
इस फिल्म ने श्रीदेवी को हिंदी सिनेमा में पूरी तरह स्थापित कर दिया। वहीं, यह फिल्म जीतेन्द्र के लिए भी टर्निंग पॉइंट साबित हुई, जिसके बाद उन्होंने दक्षिण भारतीय निर्माताओं के साथ कई सफल हिंदी फिल्में कीं।
हिम्मतवाला सिर्फ़ एक हिट फिल्म नहीं थी—यह करियर बदलने वाली, रिश्ते गढ़ने वाली और कुछ रिश्तों को हमेशा के लिए दूर कर देने वाली फिल्म भी थी।
