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डैनी डेंज़ोंगपा को ‘धुंध’ कैसे मिली? बी.आर. चोपड़ा के स्क्रीन टेस्ट से बदल गई किस्मत

  • February 26, 2026

मैं ये रोल बहुत बेहतर निभा सकता हूं। आप बस एक मौका दीजिए… मेरा स्क्रीन टेस्ट ले लीजिए।

जब एक युवा और संघर्षरत अभिनेता ने यह बात निर्देशक बी.आर. चोपड़ा से कही, तब शायद किसी को अंदाज़ा नहीं था कि यह जिद आगे चलकर हिंदी सिनेमा के इतिहास का अहम हिस्सा बन जाएगी।

यह कहानी है डैनी डेंज़ोंगपा की — उस दौर की, जब वे फिल्म इंस्टिट्यूट के छात्र थे और इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहे थे।

फिल्म इंस्टिट्यूट से शुरू हुआ भरोसे का रिश्ता

सन् 1969-70 के आसपास, जब डैनी अपने अंतिम परीक्षा चरण में थे, तब परीक्षा लेने के लिए बी.आर. चोपड़ा स्वयं आए थे। परीक्षा के बाद उन्होंने डैनी को अलग से बुलाकर कहा कि उनमें कुछ अलग बात है — एक सहज अभिनय शैली, जो उन्हें भीड़ से अलग करती है।

डैनी के लिए यह पल बेहद खास था। उन्होंने बताया कि बचपन में दार्जिलिंग के एक सिनेमाघर में उन्होंने चोपड़ा साहब की फिल्म नया दौर देखी थी। हिंदी भाषा ठीक से समझ नहीं आती थी, लेकिन सिनेमा का जादू दिल में उतर गया था। उसी दिन से फिल्मों में आने का सपना मजबूत हो गया।

संघर्ष, मुलाकातें और इंतज़ार

कोर्स पूरा कर जब डैनी मुंबई पहुंचे, उस समय बी.आर. चोपड़ा, दिलीप कुमार के साथ फिल्म दास्तान पर काम कर रहे थे। डैनी ने मुलाकात की, लेकिन उस फिल्म में उनके लिए कोई भूमिका नहीं थी। उन्हें सलाह मिली — मिलते रहो, संघर्ष जारी रखो।

धीरे-धीरे डैनी को काम मिलने लगा। गुलज़ार की फिल्म मेरे अपने से उन्होंने डेब्यू किया। इसके बाद कुछ और फिल्मों में भी छोटे-बड़े किरदार निभाए।

‘धुंध’ की स्क्रिप्ट और पहला प्रस्ताव

एक दिन बी.आर. चोपड़ा के दफ्तर में डैनी को बुलाया गया। कमरे में कई नामी लेखक बैठे थे, जिनमें अख्तर-उल-ईमान भी शामिल थे। उन्हें एक नई फिल्म की स्क्रिप्ट सुनाई गई — यह थी धुंध

डैनी से पूछा गया कि स्क्रिप्ट में क्या कमी है। उन्होंने सुझाव दिया कि विलेन का प्रवेश इंटरवल से पहले हो तो प्रभाव अधिक पड़ेगा। यह सुनकर लेखक प्रभावित हुए।

उन्हें इंस्पेक्टर की भूमिका ऑफर हुई। लेकिन डैनी को हीरोइन के पति यानी नकारात्मक किरदार में ज्यादा संभावना दिखी।

अमिताभ और शत्रुघ्न के बाद खुला रास्ता

उस समय पति की भूमिका के लिए अमिताभ बच्चन को साइन किया जा चुका था। लेकिन फिल्म आनंद की सफलता के बाद अमिताभ ने निगेटिव रोल करने से इनकार कर दिया।

इसके बाद यह भूमिका शत्रुघ्न सिन्हा को दी गई। मगर एक मीटिंग में समय पर न पहुंचने की वजह से उन्हें फिल्म से हटा दिया गया।

अब डैनी ने फिर दस्तक दी।

स्क्रीन टेस्ट: आख़िरी दांव

चोपड़ा साहब को लगता था कि डैनी उम्र में छोटे लगते हैं। किरदार एक परिपक्व, अपाहिज और वर्षों से विवाहित व्यक्ति का था। मगर डैनी ने जिद की — “एक स्क्रीन टेस्ट ले लीजिए।”

मेकअप हुआ। लुक तैयार हुआ। कैमरा चला।

और स्क्रीन पर जो नजर आया, उसने फैसला बदल दिया।

ठाकुर रंजीत सिंह का किरदार डैनी को मिल गया।

अगाथा क्रिस्टी से जुड़ी कहानी

फिल्म धुंध दरअसल मशहूर लेखिका Agatha Christie के 1958 के उपन्यास The Unexpected Guest पर आधारित थी। 23 फरवरी 1973 को रिलीज़ हुई यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सफल रही और डैनी की पहचान मजबूत हो गई।

भाषा को लेकर फैली अफवाह

फिल्म रिलीज़ होने के बाद अफवाह उड़ी कि डैनी को हिंदी नहीं आती और उनके संवाद डब किए गए हैं। मामला बढ़ा तो बी.आर. चोपड़ा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर साफ कहा कि सारे डायलॉग डैनी ने खुद बोले हैं।

यह समर्थन डैनी के करियर के लिए बेहद अहम साबित हुआ।

प्लेट वाला मशहूर सीन

फिल्म में डैनी की एंट्री एक ऐसे दृश्य से होती है, जहां वे गुस्से में प्लेट फेंकते हैं। यह आइडिया खुद डैनी का था। शुरुआत में चोपड़ा साहब को यह सीन अनावश्यक लगा, मगर बार-बार आग्रह पर शूट किया गया।

कैमरे की सुरक्षा के लिए सामने शीशा लगाया गया। डैनी ने चतुराई से प्लास्टिक प्लेट का इस्तेमाल किया।

फिल्म रिलीज़ होने पर इसी सीन की सबसे ज्यादा तारीफ हुई।

आगे का सफर और ‘घातक’

डैनी ने आगे चलकर कई यादगार भूमिकाएं निभाईं। खासकर फिल्म घातक में उनका खलनायकी अवतार आज भी चर्चित है। उसी साल फिल्म दरार के लिए अरबाज़ खान को पुरस्कार मिला, जबकि कई लोगों का मानना था कि डैनी उस सम्मान के हकदार थे।

निष्कर्ष

यह कहानी सिर्फ एक फिल्म पाने की नहीं है। यह कहानी है आत्मविश्वास, धैर्य और सही समय का इंतज़ार करने की। अगर डैनी उस दिन स्क्रीन टेस्ट की जिद न करते, तो शायद ‘धुंध’ में ठाकुर रंजीत सिंह का किरदार किसी और के हिस्से में जाता।

और हिंदी सिनेमा एक यादगार प्रदर्शन से वंचित रह जाता।