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मिस्टर इंडिया ने कैसे बदली अन्नू कपूर की ज़िंदगी – संघर्ष, यादें और अनसुने किस्से

  • February 20, 2026

मैंने बोनी कपूर से पांच हज़ार रुपए एडवांस मांगे थे, और उसी दिन जाकर अपने लिए एक छोटा सा कमरा किराए पर ले लिया था।”

ये शब्द हैं अभिनेता अन्नू कपूर के, जो उन्होंने एक इंटरव्यू में अपनी ज़िंदगी के सबसे अहम मोड़ को याद करते हुए कहे थे।

6 जुलाई 1985 का वो दिन अन्नू कपूर कभी नहीं भूलते। उस वक्त वो एक दोस्त के घर रह रहे थे। बोनी कपूर से मिले उसी छोटे से एडवांस ने उन्हें पहली बार अपनी अलग पहचान और आत्मसम्मान का एहसास कराया। वही दौर था, जब फ़िल्म मिस्टर इंडिया ने उनके करियर को नई दिशा दी।

झुग्गी से संघर्ष तक का सफ़र

अन्नू कपूर का जन्म 20 फ़रवरी 1956 को भोपाल में हुआ था। उन्होंने खुद बताया कि उनका बचपन स्लम एरिया में बीता। ग़रीबी इतनी थी कि पढ़ाई में अव्वल होने के बावजूद वे आगे कॉलेज नहीं जा सके। दसवीं में 93 प्रतिशत अंक लाने के बाद भी हालात ने उन्हें काम करने पर मजबूर कर दिया।

टैक्सटाइल मिल में नौकरी, लॉटरी टिकट बेचना—ज़िंदगी में संघर्ष हर मोड़ पर मौजूद था। डॉक्टर बनने का सपना अधूरा रह गया, लेकिन किस्मत उन्हें अभिनय की दुनिया तक ले आई।

मिस्टर इंडिया: एक अलग दौर की फ़िल्म

अन्नू कपूर मानते हैं कि मिस्टर इंडिया उस ज़माने से बहुत आगे की फ़िल्म थी। तकनीक सीमित थी, लेकिन कल्पनाशक्ति असीम। निर्देशक शेखर कपूर ने इस फ़िल्म को एक फैंटेसी के रूप में गढ़ा।

सेट पर हर सीन के लिए दो-तीन टेक्स ही लिए जाते थे। उसके बाद शेखर कपूर कलाकारों को पूरी आज़ादी देते थे कि वे सीन को अपने अंदाज़ में निभाएं। यही क्रिएटिव फ्रीडम फ़िल्म की आत्मा बन गई।

राज कंवर से जुड़ी यादें

मिस्टर इंडिया में शेखर कपूर के असिस्टेंट डायरेक्टर थे राज कंवर। अन्नू कपूर आज भी उन दिनों को भावुक होकर याद करते हैं, जब राज कंवर रोज़ सफ़ेद एंबेसडर कार में उन्हें शूटिंग पर ले जाया करते थे। सेट तक के सफ़र में सिनेमा पर लंबी बातचीत होती थी—ऐसी यादें जो आज भी दिल के क़रीब हैं।

तारीफ़ मिली, लेकिन बदलाव नहीं

मिस्टर इंडिया जैसी सुपरहिट फ़िल्म का हिस्सा बनने के बावजूद अन्नू कपूर का मानना है कि इस फ़िल्म के बाद उनका करियर अचानक ऊंचाइयों पर नहीं पहुंचा। तारीफ़ें मिलीं, पहचान बनी, लेकिन बड़े मौके सीमित ही रहे।

हालांकि एक पल ऐसा भी आया जिसने उन्हें भीतर से मजबूत कर दिया। महानायक अमिताभ बच्चन ने एक इंटरव्यू में अपने पसंदीदा अभिनेताओं में अन्नू कपूर का नाम लिया। ये उनके लिए किसी पुरस्कार से कम नहीं था।

इसके बाद उन्हें अमिताभ बच्चन के साथ मैं आज़ाद हूं में काम करने का अवसर मिला, जो उनके करियर की अहम उपलब्धि रही।

70 साल की उम्र में भी वही सादगी

आज 70 वर्ष की उम्र में भी अन्नू कपूर वही ज़मीन से जुड़े कलाकार हैं, जिनके लिए संघर्ष, ईमानदारी और आत्मसम्मान सबसे बड़ी पूंजी रहे हैं। मिस्टर इंडिया ने भले ही उनकी ज़िंदगी पूरी तरह न बदली हो, लेकिन उन्हें वो पहचान ज़रूर दी, जिसे वे आज भी गर्व से याद करते हैं।

किस्सा टीवी की तरफ़ से अन्नू कपूर साहब को जन्मदिन की ढेरों शुभकामनाएं।