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बवासीर (Piles) क्या है? कारण, लक्षण और आयुर्वेदिक घरेलू इलाज

  • February 14, 2026

बवासीर एक ऐसी बीमारी है जो व्यक्ति को शारीरिक और मानसिक दोनों रूप से कष्ट पहुंचाती है। गुदा मार्ग की नसों में सूजन आ जाने से मटर के दाने जैसे मांसल उभार बन जाते हैं, जिन्हें आयुर्वेद में अर्श और आम बोलचाल में बवासीर कहा जाता है। यह रोग मुख्य रूप से दो प्रकार का होता है— बादी बवासीर और खूनी बवासीर।

बादी बवासीर में गुदा क्षेत्र में दर्द, जलन, सूजन और खुजली होती है, जबकि खूनी बवासीर में मस्सों के मल से टकराने पर रक्तस्राव होने लगता है।

बवासीर होने के प्रमुख कारण

बवासीर का सबसे बड़ा कारण कब्ज माना जाता है। इसके अलावा अनियमित खान-पान, अत्यधिक मिर्च-मसालेदार व तला-भुना भोजन, शराब और नशीले पदार्थों का सेवन, धूम्रपान, देर रात तक जागना, शारीरिक श्रम व व्यायाम की कमी, लगातार बैठे रहने वाला कार्य, यकृत की कमजोरी तथा अत्यधिक मानसिक तनाव भी इस रोग को जन्म देते हैं।

बवासीर के लक्षण

इस रोग में मल का सख्त होना, कम मात्रा में पाखाना होना, गुदा में चुभन जैसा दर्द, जलन, खुजली, रक्तस्राव, कमजोरी, चक्कर आना, घबराहट, भूख न लगना, आंखों में सूजन और पेट में गैस जैसी समस्याएं देखने को मिलती हैं। अधिक रक्तस्राव होने पर शरीर पीला पड़ सकता है।

खूनी बवासीर

खूनी बवासीर में प्रारंभिक अवस्था में दर्द नहीं होता, केवल खून आता है। पहले मल के साथ, फिर टपक-टपक कर और आगे चलकर पिचकारी की तरह रक्तस्राव होने लगता है। इसमें मस्सा अंदर की ओर होता है जो समय के साथ बाहर आने लगता है। प्रारंभ में यह स्वयं अंदर चला जाता है, लेकिन अधिक पुराना होने पर हाथ से दबाने पर ही अंदर जाता है और अंतिम अवस्था में बिल्कुल अंदर नहीं जाता।

बादी बवासीर

बादी बवासीर में पेट हमेशा खराब रहता है, कब्ज और गैस बनी रहती है। इसमें जलन, दर्द, खुजली, बेचैनी और काम में मन न लगने जैसी समस्याएं होती हैं। मल अधिक कठोर होने पर कभी-कभी खून भी आ सकता है। इसमें मस्से अंदर होते हैं, जिससे मल त्याग का मार्ग संकरा हो जाता है और घाव बन सकता है, जिसे चिकित्सकीय भाषा में फिशर कहा जाता है।

यदि बवासीर लंबे समय तक बनी रहे तो यह भगंदर का रूप ले सकती है और अत्यधिक गंभीर स्थिति में यह रेक्टम कैंसर का कारण भी बन सकती है। इसलिए समय रहते उपचार आवश्यक है।

🌿 बवासीर के आयुर्वेदिक घरेलू उपाय

🥛 छाछ (लस्सी)

मट्ठा बवासीर के मस्सों को कम करने में सहायक होता है। लगभग दो लीटर छाछ में 50 ग्राम भुना पिसा जीरा और स्वादानुसार नमक मिलाएं। प्यास लगने पर पानी की जगह इसका सेवन करें। चार दिन तक ऐसा करने से लाभ मिलता है। नियमित दही खाने से भी बवासीर की संभावना कम होती है।

🌿 त्रिफला

त्रिफला चूर्ण कब्ज दूर करने का प्रभावी उपाय है। रात को सोने से पहले 1–2 चम्मच त्रिफला चूर्ण गुनगुने पानी के साथ लेने से मल साफ होता है और बवासीर में राहत मिलती है।

🌱 जीरा

भुने हुए जीरे को मिश्री के साथ चूसने से पाचन सुधरता है। आधा चम्मच जीरा पाउडर पानी के साथ लेने या जीरे का लेप मस्सों पर लगाने से भी लाभ होता है।

🍌 केला और कत्था

पके केले को बीच से चीरकर उस पर कत्था बुरकें और रातभर खुले स्थान पर रखें। सुबह खाली पेट इसका सेवन करें। यह प्रयोग एक सप्ताह तक करने से बवासीर में लाभ मिलता है।

🍯 अंजीर

सूखे अंजीर को रात में गर्म पानी में भिगो दें। सुबह खाली पेट खाने से कब्ज दूर होती है और बवासीर में राहत मिलती है।

🌿 हरीतकी (हरड़)

हरड़ चूर्ण आधा से एक चम्मच रात को गुनगुने पानी या गुड़ के साथ लेने से कब्ज व बवासीर की समस्या में लाभ होता है।

🥥 नारियल की जटा

नारियल की जटा को जलाकर भस्म बना लें। इस भस्म को ताजी छाछ या दही के साथ खाली पेट एक दिन में तीन बार लें। ध्यान रहे दही या छाछ खट्टी न हो।

🍋 आंवला

आंवला पाचन तंत्र को मजबूत करता है। बवासीर में आंवला चूर्ण को सुबह-शाम शहद के साथ लेने से लाभ होता है। #बवासीर #PilesTreatment #AyurvedicUpchar #घरेलूउपाय #कब्ज #स्वस्थजीवन #IndianHealth #AyurvedaTips