
नाभी: शरीर का एक अद्भुत ऊर्जा केंद्र और पारंपरिक उपचार पद्धति
नाभी को भारतीय परंपरा में केवल शरीर का एक अंग नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण ऊर्जा और पोषण केंद्र माना गया है। आयुर्वेद और लोक चिकित्सा के अनुसार, नाभी का सीधा संबंध शरीर की अनेक नसों और आंतरिक प्रणालियों से होता है।
एक उदाहरण के रूप में, 62 वर्ष के एक व्यक्ति को अचानक बाईं आँख से कम दिखाई देने लगा, विशेषकर रात के समय। जाँच में यह सामने आया कि आँख की संरचना तो ठीक है, लेकिन उससे जुड़ी कुछ रक्त नलिकाएँ कमजोर हो रही हैं। आधुनिक चिकित्सा में इसे स्थायी समस्या बताया गया, लेकिन पारंपरिक ज्ञान इसे अंतिम सत्य नहीं मानता।
नाभी का वैज्ञानिक और पारंपरिक महत्व
गर्भावस्था के दौरान शिशु को पोषण नाभि से जुड़ी नाल के माध्यम से मिलता है। यही कारण है कि जन्म के बाद भी नाभी को शरीर की केंद्रीय कड़ी माना जाता है। मान्यता है कि नाभी के पीछे स्थित क्षेत्र (जिसे कुछ परंपराओं में पेचूटी कहा जाता है) से हजारों नसें और रक्त धमनियाँ जुड़ी होती हैं।
इसी कारण आयुर्वेद और घरेलू उपचारों में नाभी में तेल या घी डालने की परंपरा रही है।
नाभी में तेल डालने के पारंपरिक लाभ
ध्यान दें: ये उपाय पारंपरिक अनुभवों और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं, किसी भी गंभीर समस्या में चिकित्सकीय सलाह आवश्यक है।
1. आँखों की कमजोरी, त्वचा और बालों के लिए
रात को सोने से पहले 3–7 बूँदें शुद्ध देशी गाय का घी या नारियल तेल नाभी में डालकर, उसके चारों ओर लगभग डेढ़ इंच तक हल्के हाथ से फैलाएँ।
यह उपाय शरीर में रूखापन कम करने और पोषण संतुलन बनाए रखने में सहायक माना जाता है।
2. घुटनों और जोड़ों के दर्द में
अरंडी के तेल की 3–7 बूँदें नाभी में लगाकर आसपास फैलाएँ।
लोक अनुभवों के अनुसार यह जोड़ों की जकड़न और दर्द में राहत देने में सहायक हो सकता है।
3. शरीर में कंपन, जोड़ोँ का दर्द और शुष्क त्वचा
सरसों या राई का तेल नाभी में लगाने की परंपरा है, जिससे शरीर में गर्माहट और रक्त संचार बेहतर होने की मान्यता है।
4. चेहरे पर पिंपल और त्वचा संबंधी समस्याएँ
नीम का तेल नाभी में लगाने को त्वचा की अशुद्धियाँ कम करने में सहायक माना जाता है।
नाभी में तेल क्यों लगाया जाता है?
परंपरागत मान्यता के अनुसार, नाभी शरीर की आवश्यकता को पहचानकर संबंधित नसों तक पोषण पहुँचाने का माध्यम बनती है। यही कारण है कि शिशुओं के पेट दर्द में आज भी नाभी के आसपास तेल या हींग का लेप किया जाता है, जिससे उन्हें तुरंत राहत मिलती है।
निष्कर्ष
नाभी में तेल डालना एक सरल, सुरक्षित और पीढ़ियों से चला आ रहा घरेलू उपाय है। यह आधुनिक चिकित्सा का विकल्प नहीं, बल्कि शरीर की देखभाल की एक सहायक पारंपरिक विधि है।
जैसा कि कहा जाता है —
“करने से होता है, केवल पढ़ने से नहीं।”
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